The collection
Ghazals, Nazams, Kavitayan, and Kahaniyan — each piece a door left slightly khula.
Shashi Airi — The Poet of this Mehfil
All of Shashi Airi's ghazals are on his dedicated page
जो यादें हमने बंद कर रखी थीं, वो बिन बुलाए दिल में उतर आती हैं।
जो बात लफ़्ज़ों में न कही जा सके, वो ख़ामोशी में ख़ुद-ब-ख़ुद कह दी जाती है।
राख में भी एक रोशनी छुपी होती है — जो गिरता है, वही फिर उठता है।
जो दरिया सब कुछ देकर बह जाता है, उसी की कहानी किनारों पर ज़िंदा रहती है।
घर की महक, माँ की छाँव, और बचपन के वो लम्हे — जो गुज़र गए पर भूले नहीं।
शमा जलती रही, रात गुज़रती रही — पर जिसका इंतेज़ार था, वो न आया।
तन्हाई बुरी नहीं — वही वो आईना है जिसमें इंसान ख़ुद से मिलता है।
क़लम उठाओ — दिल में जो दबा है बरसों से, उसे लफ़्ज़ों में ढालने का वक़्त आ गया।