ग़ज़ल1 January 2026

लफ़्ज़ों का मौसम

शब्दों के मौसम पर एक ग़ज़ल

फिर आया है लफ़्ज़ों का मौसम, क़लम उठाओ तो,

दिल में जो दबा है अरसे से, वो बात सुनाओ तो।

शब्दों की बारिश में भीगो, कुछ देर रुको यहाँ,

इस मौसम की ख़ुशबू को, दिल में बसाओ तो।

जो कहा नहीं जा सका, वो लफ़्ज़ों में ढल जाए,

क़लम की नोक से, वो दर्द बाहर लाओ तो।

हर शब्द एक बीज है, हर पंक्ति एक पेड़,

इस बाग़ में आकर, कुछ देर बैठ जाओ तो।

शाशी, ये लफ़्ज़ों का मौसम बार-बार नहीं आता,

जब आए, तो इसे, दिल से अपनाओ तो।

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