ग़ज़ल1 June 2026
ख़ामोशी की ज़ुबान
ख़ामोशी और उसके अर्थ पर एक ग़ज़ल
ख़ामोशी की भी एक ज़ुबान होती है यारों,
जो बात न कह सके लफ़्ज़, वो बयान होती है यारों।
नज़रों से जो कह दिया, वो दिल तक पहुँच गया,
आँखों की भाषा भी एक इम्तिहान होती है यारों।
शमा जलती है चुपचाप, पर रोशनी देती है,
ख़ामोश दिल की भी एक पहचान होती है यारों।
जो बोल न सके, वो आँसू बन के बह जाते हैं,
हर चुप्पी के पीछे एक दास्तान होती है यारों।
शाशी ने जो लिखा, वो दिल की आवाज़ है,
ख़ामोशी में भी एक अज़ान होती है यारों।
Poet's note
एक महफ़िल के बाद लिखी गई, जो बहुत जल्दी ख़त्म हो गई।
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