Ghazal1 July 2026
मेरी मर्ज़ी के ख़िलाफ़: यादों की दस्तक
कभी-कभी दिल के दरवाज़े उन लोगों के लिए खुल जाते हैं जिन्हें हम बरसों से संजोए हुए अपनी यादों की तिजोरी में बंद रखना चाहते थे।
मेरी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ तू आया है दिल में,
Poet's note
एक ऐसी बेबसी और रूहानी दस्तक को बयां करती यह ग़ज़ल — जहाँ यादें महमान नहीं, मुसाफ़िर बनकर रूह में बस जाती हैं।
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