यादों और अपनापन महसूस कराने वाली एक कविता
वो घर की खुशबू में घी का तड़का, वो सोंधी-सोंधी महक फूलों की
ऐ 'शशि' अब इन यादों को मैं, भला कहाँ से लाऊँ, बताओ तो?
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