Urdu Ghazals by Shashi Airi

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Ghazals

The ghazal — a form of longing, each sher a world unto itself.

मेरी मर्ज़ी के ख़िलाफ़: यादों की दस्तक

जो यादें हमने बंद कर रखी थीं, वो बिन बुलाए दिल में उतर आती हैं।

1 July 2026→

ख़ामोशी की ज़ुबान

जो बात लफ़्ज़ों में न कही जा सके, वो ख़ामोशी में ख़ुद-ब-ख़ुद कह दी जाती है।

1 June 2026→

राख और रोशनी

राख में भी एक रोशनी छुपी होती है — जो गिरता है, वही फिर उठता है।

1 May 2026→

दरिया का ख्वाब

जो दरिया सब कुछ देकर बह जाता है, उसी की कहानी किनारों पर ज़िंदा रहती है।

1 April 2026→

शब-ए-इंतेज़ार

शमा जलती रही, रात गुज़रती रही — पर जिसका इंतेज़ार था, वो न आया।

1 February 2026→

तन्हा रात का सफ़र

तन्हाई बुरी नहीं — वही वो आईना है जिसमें इंसान ख़ुद से मिलता है।

15 June 2026→

लफ़्ज़ों का मौसम

क़लम उठाओ — दिल में जो दबा है बरसों से, उसे लफ़्ज़ों में ढालने का वक़्त आ गया।

1 January 2026→